Political Trends


 23, May 2022 12:02 PM     24

Current election process and main challenges in the country


भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। यहाँ की संघीय सरकार प्रत्येक पाँच वर्ष के अंतराल पर चुनाव के माध्यम से चुनी जाती है। देश के नागरिक इस चुनावी प्रक्रिया में सीधे तौर पर भाग लेते हैं। भारतीय संविधान के अनुसार देश में नियमित, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव आयोजित करने का अधिकार निर्वाचन आयोग को प्राप्त है। हर पांच साल में नियमित एक बार देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव अलग-अलग आयोजित होते हैं। लोकसभा के चुनाव के माध्यम से देश में हमारे सांसद जो देश के लोकसभा में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते है वो चुने जाते हैं , तो वहीँ विधानसभा के चुनाव से हमारे विधायक जो राज्य की विधानसभा में अपने निर्वाचित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम सभी जानते हैं की लोकसभा के चुनाव से देश के प्रधानमंत्री का फैसला होता है तो वहीँ विधानसभा का चुनाव राज्य को मुख्यमंत्री देता है। भारत जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, वहां हम अक्सर ये देखते हैं की हर चुनाव के समापन के बाद चुनाव व्यवस्था व् इसके प्रबंधन पर निरंतर सवाल विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के द्वारा उठाये जाते हैं। कारण इसके कई हो सकते हैं कहीं राजनीतिक पार्टियों की आपसी वैमन्यस्ता तो कहीं पार्टियों के बीच गठबंधन और आपसी मेल का ताना बाना। पर इन सबसे परे हमारे देश के चुनाव व्यवस्था में सच में कई मुद्दे ऐसे हैं जिसमें व्यापक सुधार की जरुरत है। पिछले कई वर्षो से चुनाव प्रक्रिया में विविध प्रकार के सामयिक बदलावों पर चर्चा होती रही है। इनमें से कई प्रासंगिक बदलावों को केंद्र सरकार अमलीजामा पहनाने की तैयारी में है। चुनाव सुधार के जिन अहम बिंदुओं पर तेजी से काम चल रहा है, उनमें फर्जी मतदान और मतदाता सूची में दोहराव को रोकने के लिए मतदाता पहचान पत्र को आधार कार्ड से जोड़ने, पूरे देश में एक ही मतदाता सूची तैयार करने, जिसका इस्तेमाल लोकसभा और विधानसभा चुनावों से लेकर पंचायत और नगर निगम आदि के चुनावों में होगा और चुनाव आयोग को और शक्तियां देने जैसे कदम शामिल हैं।



विशेषतः आज हमारे चुनाव व्यवस्था के सामने जो सबसे बड़ा प्रश्न है की आखिर हमारे देश के आम चुनाव में कैसे धन और बल के उपयोग पर लगाम लगाया  जा सके जिससे एक स्वस्थ लोकतंत्र की नींव स्थापित की जा सके। आज एक शिक्षित और ईमानदार नागरिक के लिए चुनाव लड़ना बहुत ही कठिन होता जा रहा है। धन-बल के बढ़ते उपयोग से राजनीतिक हलकों में भ्रष्टाचार मजबूती से अपनी जड़ें जमा लेता है, जो अंतत: सारी व्यवस्था को अपने लपेटे में लेकर भ्रष्ट और कमजोर बना देता है। अक्सर ऐसे चुनावी धन का स्रोत अपराध में छिपा होता है। चुनावों में बेहिसाब धन अपराधी तत्वों द्वारा इस उम्मीद से लगाया जाता है कि चुनाव बाद वे सरकारी ठेके और दलाली पर काबिज हो सकेंगे तथा खर्च की गई रकम को सूद समेत वसूल कर लेंगे। यहीं से राजनीतिक भ्रष्टाचार की शुरुआत हो जाती है। आज धनबल और बाहुबल के उपयोग से ही जमीनी चुनाव प्रचार में कई तरह की मुश्किलों का सामना एक राजनीतिक दल या एक उम्मीदवार को करना पड़ रहा है। इन सब से आसान और धांधली से मुक्त आज हमारे देश में राजनीतिक पार्टियों और उनके उम्मीदवारों के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से चुनाव प्रचार कराना सहूलियत भरा निर्णय साबित हो रहा है। सोशल मीडिया से आज चुनाव प्रचार कराने के विभिन्न फायदे, हम सभी के सामने आज निकल कर आ रहे हैं। जिसमें मुख्यतः उम्मीदवारों के प्रति लोगों की राय और उनकी प्रतिक्रिया स्पष्ट तौर पर हमें देखने को मिलती है। सोशल मीडिया के चुनाव प्रचार में अहम है digital pr agency का योगदान, जो उम्मीदवारों के प्रोफाइल और उनके चुनाव प्रचार को दिशा प्रदान करते हैं। DG-PEOPLE आज चुनाव प्रचार और प्रबंधन में देश की सर्वश्रेष्ठ चुनाव प्रचार की कंपनी बन कर उभरी है। हम आपको चुनाव में हमारी रणनीतियों से आपकी जीत की राह को सुनिश्चित करते हैं। advertising and public relations से आप विज्ञापन और हमारे विभिन्न प्रचार के माध्यमों से जनता तक सीधे अपनी बात पहुंचा सकते हैं। आज ही संपर्क करें देश की अग्रणी digital pr agency DG-PEOPLE से।


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